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- Subgroup of Jain Community (en)
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- सिद्धेभ्यः श्री ...सम्वत् 1525 वर्षे चैत्र सुदी 15 मूलसंघे सरस्वती गच्छे बलाकार गणे श्री कुन्दकुन्दाचार्यान्वये आम्नाय भट्टारक श्री प्रभाचंद्र देवा ततो पट्टे .. भट्टारक श्री सिंहकीर्ति यतीश्वरा तेषाम् उपदेशात् श्री गोपाचल महादुर्गे श्री तोमरान्वये महाराजाधिराज श्री कीर्तिसिंह विजयराजे। ...सिद्ध प्रतिष्ठा श्री इक्ष्वाकु वंशोन्दवा गोलारोड ति मद्ये संघातिपति पम ॥श्री॥ ...सुहाग श्री तत्पुत्रा माणिक सं. अश्वपति सं. कुषराज सं.... ये तषाम मध्ये संघादिपतियम्। भूपतयः बंधु निज पुत्र पौत्रो श्री पार्श्वनाथ तीर्थश्वरम् नित्यं पूज्याम् प्रणमति श्री शांति रस्तु शिवम् सुख नित्य आरोग्य भवतु... सिद्धरस्तु शत्रु निवारन कुल गोत्र वंशादष्टु इति श्री राजा श्रावक प्रजासुखी नो भवन्तु धर्मोवृद्धिताम् श्री॥ (en)
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- A Gwalior Fort Inscription Samvat 1525 (en)
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